डिजिटल क्लास रूम बनाने डेढ़ साल में भी नहीं हुआ एजेंसी का चयन
भोपाल। प्रदेश में 6वीं से लेकर 8वीं तक वर्चुअल दुनिया के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई कराने की योजना अधर में लटक गई है। सरकारी स्कूलों में आॅगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) से लैस क्लास रूम बनाने की योजना डेढ़ साल से लेटलतीफी का शिकार हो रही है। राज्य शिक्षा केंद्र ने दो बार इसके टेंडर निरस्त कर चुकी है। वहीं इसके बाद योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। इससे प्रदेश के 52 स्कूलों में आधुनिक तकनीक के जरिए शिक्षा देने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। बता दें कि प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक स्कूल में क्लास रूम में एआर-वीआर वाली एक्टिविटी, थ्रीडी प्रिंटर, थ्रीडी-पेन और रोबोटिक्स गतिविधियों की सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। 6वीं से 8वीं कक्षा के लिए अलग-अलग मैनुअल में 21 मॉड्यूल का कोर्स तैयार किया जा चुका है। छठवीं में बुनियादी, सातवीं में मध्यम और आठवीं के लिए एडवांस स्तर की गतिविधियां निर्धारित की हैं। इसके अलावा शिक्षकों को इन लैब के संचालन और पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाना है। बता दें कि प्रोजेक्ट लागू करने के लिए प्रदेश को तीन क्लस्टर में बांटा गया है। इसमें पहला क्लस्टर भोपाल है। इसमें 19 जिले शामिल हैं। वहीं दूसरा क्लस्टर इंदौर में मालवा-निमाड़ के 18 जिले और तीसरे क्लस्टर जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के 15 जिले शामिल हैं।
बच्चो की रचनात्मकता और कल्पना शक्ति बढ़ाने में मदद
वर्जुअल दुनिया से पढ़ाई में बच्चों को तकनीकी विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने, कल्पना शक्ति और रचनात्मकता को बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्चुअल रियलिटीह कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के जरिए आभासी दुनिया का अनुभव देती है। इसमें उपयोगकर्ता अपने सिर के मूवमेंट के साथ आभासी दृश्य देख सकता है। वहीं, आॅगमंटेउ रियलिटी वास्तविक वातावरण में डिजिटल जानकारी को जोड़कर उसे और आकर्षक बनाता है।
रोबोटिक्स लैब बनाने की योजना
प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक सरकारी स्कूल में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स और मैथमेटिक्स (स्टीम) शिक्षा प्रणाली के तहत क्लास रूम रोबोटिक्स लैब बनाने की योजना है। राज्य शिक्षा केंद्र के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य छात्रों को इंटरेक्टिव और आभासी अनुभव के जरिए विषयों की गहरी समझ विकसित करना है। इसके तहत छात्रों को क्लास रूम में डायनासोर, आकाशगंगा, सौर मंडल और वन्य जीवों जैसे दृश्यों को आभासी रूप में देखने का अवसर मिलना है। छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, समस्या समाधान, संचार, टीम वर्क और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने की क्षमता विकसित करने के लिए ऐसी लैब की डिजाइन तैयार की गई।
2024 में हुई थी प्रोजेक्ट की शुरुआत
इस प्रोजैक्ट की शुरुआत फरवरी 2024 में हुई थी। हर जिले के एक स्कूल में प्रोजेक्ट सफल होने के बाद सभी प्रमुख स्कूलों में इसे शुरू करना था, लेकिन ऐसा हो नही सका। प्रोजेक्ट के रुकने से सरकारी स्कूलों के छात्र आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। लैब स्थापित नहीं होने से छात्रों को इंटरेक्टिव और व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों को भी नई तकनीक से पढ़ाने का प्रशिक्षण नहीं मिल पाया है।
कब-कब निरस्त हुए टेंडर
राज्य शिक्षा केंद्र ने निजी एजेंसी के साथ पांच साल की साझेदारी की योजना बनाई है। इसके लिए फरवरी 2024 में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। इस टेंडर में चार फर्मों ने हिस्सा लिया, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र ने कारण बताए बिना सात अगस्त 2024 को टेंडर निरस्त कर दिया था। इसके बाद नवंबर 2024 में फिर से टेंडर जारी किया गया। इस बार कोई भी फर्म काम करने आगे नहीं आई। इसलिए जनवरी में यह टेंडर भी निरस्त करना पड़ा। इसके बाद आरएसके ने इस प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने की कोशिश ही छोड़ दी।
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