नाबार्ड के सहयोग से भोपाल में विभिन्न कार्यों में तेजी लाने हेतु रणनीतिक कार्यशाला का आयोजन
भोपाल, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने नाबार्ड और मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से 21 अगस्त 2025 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य तीन प्रमुख सहकारी पहलों यथा बहुउद्देशीय पैक्स का गठन, दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना और पैक्स तथा कृषि विकास बैंकों का कम्प्यूटरीकरण के अंतर्गत 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, अर्थात् मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश में प्रगति को सुव्यवस्थित करना था। इस कार्यशाला में मंत्रालय, नाबार्ड मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य सहकारिता विभागों, क्षेत्रीय सहकारी समितियों, भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य सहकारी बैंकों तथा जिला सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 500 से अधिक डीसीसीबी और पैक्स प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से इसमें भाग लिया, जो जमीनी स्तर पर सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के लिए समावेशी और सहभागी नीति के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यशाला की मुख्य विशेषताएँ
1. बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का गठन, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत को सहकारी संस्थाओं से परिपूर्ण करना है। इस पहल का लक्ष्य देश भर में 2 लाख नई सहकारी समितियों का गठन करना है। ये सहकारी समितियाँ रोजगार सृजन और समावेशन पर ध्यान केंद्रित करते हुए ऋण, इनपुट आपूर्ति, विपणन और प्रसंस्करण सहित विविध सेवाएँ प्रदान करेंगी।
2. सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना - भारत में 166 एमएमटी भंडारण की कमी के साथ, मंत्रालय ने पैक्स स्तर पर विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण अवसंरचना के निर्माण के लिए ₹1 लाख करोड़ की पहल शुरू की है। 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पायलट कार्यान्वयन के लिए 1,711 पैक्स की पहचान की गई है।
3. पैक्स और एआरडीबी का कम्प्यूटरीकरण - इस परियोजना का लक्ष्य देश भर में लगभग 67,000 पैक्स का डिजिटलीकरण करना है। यह पहल पारदर्शिता, परिचालन दक्षता और बेहतर वित्तीय समावेशन आदि को बढ़ावा देती है। कार्यशाला के दौरान, इन योजनाओं के अंतर्गत हुई प्रगति का आकलन करने के लिए चर्चाएँ की गईं।
इसके अलावा, कार्यशाला को एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए हितधारकों के बीच पारस्परिक ज्ञान और अनुभव भी साझा किए गए। संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन ने कहा कि इस तरह की बातचीत से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यान्वयन और निगरानी की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक जी. एस. रावत ने अपने भाषण में प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर न केवल प्रगति का आकलन करें, बल्कि एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें, अपनी रणनीतियों को परिष्कृत करें और एक ऐसा सुदृढ़ सहकारी ढाँचा बनाएँ जो हमारे किसानों को सशक्त बनाए और ग्रामीण आजीविका में रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध करवाए।
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