एमपी किसान की ड्रोन सेवाओं से ₹3–4 लाख मासिक कमाई और खेती से ₹15 लाख सालाना लाभ
भोपाल: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मुँगवानी खुर्द गाँव के किसान सुमित सनोदिया ने मेहनत और नई सोच से अपनी खेती को बदल दिया है। उन्होंने मरुत का एजी365 कृषि ड्रोन अपनाया, जिससे खेती की लागत कम हुई, पैदावार बढ़ी और काम आसान हो गया। अब वे न केवल खुद फायदा कमा रहे हैं बल्कि आसपास के किसानों को भी ड्रोन का महत्व समझा रहे हैं।
सुमित पहले स्पंज स्टील फैक्ट्री में काम करते थे। 2020 में उन्होंने नौकरी छोड़ खेती शुरू की। पहले सोयाबीन बोया, लेकिन कम पैदावार और अनिश्चित बाज़ार से घाटा हुआ। फिर उन्होंने मक्का और चना बोना शुरू किया, जिससे बेहतर पैदावार और दाम मिले। लेकिन कीटनाशक छिड़काव का पुराना तरीका बहुत मेहनत वाला, महंगा और सेहत के लिए खतरनाक था। मरुत के किसान कार्यक्रम में भाग लेकर सुमित ने ड्रोन तकनीक के बारे में जाना और इसे अपनाने का फैसला किया। ड्रोन से छिड़काव का असर देखकर सुमित को इसका पूरा भरोसा हो गया। उन्होंने “ड्रोन ऐज़ अ सर्विस” मॉडल अपनाया और दूसरों के खेतों में भी छिड़काव शुरू किया। अब वे रोज़ 5–6 एकड़ पर सिर्फ ₹500–600 प्रति एकड़ की लागत से काम करते हैं। यह तरीका तेज़, सुरक्षित और सस्ता है। सीजन में वे ड्रोन सेवाओं से हर महीने ₹3–4 लाख तक कमा लेते हैं। इसके साथ ही खेती से उन्हें सालाना ₹10–15 लाख तक का मुनाफा होता है। सिर्फ दो साल में उन्होंने ड्रोन की पूरी लागत वसूल ली और आसपास के किसानों को भी इसका लाभ पहुँचाया। सुमित किसान उत्पादक संगठन (FPO) के साथ मिलकर ड्रोन तकनीक को गाँव-गाँव पहुँचा रहे हैं। इस नेटवर्क से और किसानों ने भी आधुनिक खेती को अपनाया है। अब उन्हें कम दाम पर सेवा मिलती है, जिससे उनकी लागत घटती है, पैदावार बढ़ती है और समय भी बचता है।सुमित कहते हैं, “पहले छिड़काव करना कठिन और महंगा था। अब ड्रोन से यह काम तेज़, आसान और सुरक्षित हो गया है। मैं 150–200 एकड़ खेत संभाल लेता हूँ और गाँव के किसानों की भी मदद कर पाता हूँ।” उनकी कहानी दिखाती है कि कैसे तकनीक गाँव की खेती को बदल सकती है। मरुत ड्रोन के सहयोग से सुमित ने साबित किया है कि नई तकनीक अपनाकर खेती टिकाऊ, सुरक्षित और ज्यादा लाभकारी बनाई जा सकती है।
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