पुणे: देश में फोर्जिंग उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी संस्था, भारतीय फोर्जिंग उद्योग संघ (AIFI) ने पुणे में अपने वार्षिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जो मोटर-वाहन तथा फोर्जिंग क्षेत्रों के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा के लिए एकजुट हुए। यह सम्मेलन फोर्जिंग सेक्टर के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण था, जिसमें परिवहन के क्षेत्र में इस इंडस्ट्री की भूमिका निर्धारित करने, दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच अवसरों की तलाश करने और विश्व स्तर पर सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मज़बूत करने के लिए सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया।
AIFI के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष सुनील जावलेकर के स्वागत संबोधन के साथ इस राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ हुआ, जिन्होंने फोर्जिंग उद्योग की विरासत, भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में इस क्षेत्र के योगदान और विश्व स्तर पर हो रहे बदलाव से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में उद्योग जगत की एकजुटता पर जोर देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा निर्धारित की। इस सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए दो मुख्य संबोधन बेहद प्रभावशाली थे। डॉ. के. सी. वोरा, प्रोग्राम डायरेक्टर, ऑटोमोटिव CoE NAMTECH, गांधीनगर, ने "भारत के संदर्भ में EV एवं ICE का भविष्य" के विषय पर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने मोटर वाहन क्षेत्र में बड़े बदलावों, सस्टेनेबल मोबिलिटी की ओर भारत के बढ़ते कदम, तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की महत्वपूर्ण भूमिका पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की, जिसे FAME II और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी सरकारी नीतियों का सहयोग मिला हुआ है। डॉ. वोरा ने EVs के क्षेत्र में इनोवेशन और इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) में निरंतर सुधार के बीच तालमेल बिठाने की अहमियत पर जोर दिया, जो भारत में अलग-अलग तरह के मोबिलिटी इकोसिस्टम में काफी मायने रखते हैं। कार्यक्रम में दूसरा मुख्य संबोधन,  प्रणयन कौल, पार्टनर, सप्लाई चेन एंड ऑपरेशंस, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, PwC ने प्रस्तुत किया, जिसका विषय "भारतीय फोर्जिंग उद्योग – चुनौतियों के दौर में संभावनाएँ" विषय था। श्री कौल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कच्चे माल प्राप्त करने में उतार-चढ़ाव और सस्टेनेबिलिटी की अनिवार्यता जैसी विपरीत परिस्थितियों के बीच, फोर्जिंग क्षेत्र से जुड़ी कंपनियाँ किस तरह दुनिया की सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों के अनुरूप ढल सकती हैं, टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी क्षमता को बढ़ा सकती हैं, और विकास के नए क्षेत्र की तलाश कर सकती हैं। इस सम्मेलन में अपने स्वागत संबोधन में भारतीय फोर्जिंग उद्योग संघ (AIFI) के अध्यक्ष,  यश मुनोत ने कहा, "फोर्जिंग इंडस्ट्री इतिहास के सबसे अहम मोड़ पर खड़ी है, क्योंकि हम सस्टेनेबिलिटी और मुकाबले में बने रहने की दोहरी चुनौती के बीच संतुलन बना रहे हैं। मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन, हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी के विकास और भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में ICE की उपयोगिता लगातार बनी रहने की वजह से देश के मोटर वाहन एवं आवागमन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है। AIFI में, हमारा मानना है कि एक मज़बूत भविष्य को आकार देने के लिए उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग सबसे ज़रूरी है। हेक्सागन के साथ MoU पर हस्ताक्षर से जाहिर है कि हम डिजिटलीकरण और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के अपने संकल्प पर कायम हैं, ताकि हमारे सभी सदस्य दुनिया के बाजारों में कड़े मुकाबले के बीच टक्कर दे सकें। आज की चर्चाओं से हमारा यह यकीन और मजबूत हुआ है कि, तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय फोर्जिंग कंपनियों के पास असीमित अवसर मौजूद हैं, बशर्ते हम इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और तेजी से काम करने की क्षमता को साथ लेकर चलें।"