रीवा का शिक्षा विभाग बना चर्चा का विषय: रातों-रात ज्वाइनिंग, महीनेभर की हाजिरी पूरी
भोपाल | रीवा के शिक्षा विभाग में अनियमितताओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. विभाग के अंदर बैठे कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और कर्मचारियों पर ऐसे गंभीर आरोप सामने आए हैं जो पूरी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं. बताया जा रहा है कि रात के समय दबे-छिपे तरीके से ज्वाइनिंग कराना, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करना और नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर तयशुदा लोगों को फायदा पहुंचाना यहां आम बात बन चुकी है|
अतिथि शिक्षिका ने किया खुलासा
इसी कड़ी में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय डोल, संकुल पड़री की अतिथि शिक्षिका सिमरन बानो कई महीनों से अपना हक पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं. उनका कहना है कि उनकी ऑनलाइन ज्वाइनिंग 22 अगस्त 2025 को हुई थी, मगर आज तक उन्हें वेतन नहीं मिला. हेडमास्टर उनकी उपस्थिति नियमित रूप से प्राचार्य को भेजते हैं, लेकिन किसी न किसी बहाने से उपस्थिति स्वीकार नहीं की जाती. आरोप यह भी है कि अल्पसंख्यक होने की वजह से उनके साथ दुर्व्यवहार और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया|
सिमरन बानो ने यह भी खुलासा किया कि पहले जिस अतिथि शिक्षक की ऑफलाइन ज्वाइनिंग कराई गई थी, वह संबंधों के आधार पर स्कूल में बना रहा क्योंकि उसके बड़े पिता उसी विद्यालय में हेडमास्टर थे. उनके रिटायर होने के बाद नए हेडमास्टर ने उस शिक्षक को ऑनलाइन पोर्टल से रिजेक्ट किया, जिसके बाद सिमरन की नियुक्ति ऑनलाइन हुई और वे तब से पढ़ा रही हैं. लेकिन 25 नवंबर 2025 को अचानक बीईओ एक अन्य अतिथि शिक्षक को स्कूल लेकर आए और उसकी ऑफलाइन ज्वाइनिंग कराई गई. इसके बाद अक्टूबर महीने की पूरी उपस्थिति एक ही दिन में रजिस्टर में भर दी गई, जिससे यह साफ हो गया कि दस्तावेजों में हेरफेर खुलेआम चल रहा है|
कलेक्टर को सौंपी शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिमरन बानो ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को शिकायत सौंपी और जिला शिक्षा अधिकारी से भी मुलाकात की है. शिक्षा अधिकारी ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन इससे पहले भी कई बार जांच का भरोसा देकर मामला लटका दिया गया है. पीड़िता का कहना है कि वे महीनों से न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन आरोपी अधिकारी और संबंधित लोग लगातार बचाए जा रहे हैं, जबकि उसका भविष्य अधर में लटका है|
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