दलहन किसानों की आय बढ़ाने के लिए गोदरेज एग्रोवेट की बड़ी पहल; मिट्टी की सेहत और कीट प्रबंधन पर जोर
मुंबई : भारत की पोषण सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका में दालों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, छोटे खेतों और कीट-बीमारियों की निरंतर प्रकोप के साथ-साथ उन्नत बीजों की कमी के कारण दालों की पैदावार प्रभावित हो रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब किसानों को जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ ठोस उपाय योजनाओं व उनका सहयोग करने की आवश्यकता है।
इन चुनौतियों के समाधान के लिए विश्व दलहन दिवस के अवसर पर गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस ने एक किसान आउटरीच पहल शुरू की है, जिसका लक्ष्य पांच लाख से अधिक दलहन किसानों तक पहुंचना था। इस पहल के तहत उन्नत कृषि पद्धतियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका ध्यान किसानों को सटीक जानकारी देकर टिकाऊ दलहन खेती के लिए सक्षम बनाने पर था।
इन प्रशिक्षण सत्रों में अरहर, चना और मूंग जैसी प्रमुख फसलों को शामिल किया गया और विभिन्न क्षेत्रों में आने वाली कृषि चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को मिट्टी की सेहत और मौसम के प्रभाव के साथ-साथ फसल के विकास की प्रक्रिया (क्रॉप फिजियोलॉजी), खेती के आधुनिक तरीकों और सीजन के दौरान कीटों से बचाव के व्यावहारिक उपायों के बारे में जागरूक किया गया।
इस पहल पर टिप्पणी करते हुए राजवेलु एनके, सीईओ- क्रॉप प्रोटेक्शन बिजनेस, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड, ने कहा कि दालों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कृषि ज्ञान की समय पर पहुंच जरूरी है। उन्होंने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता, फसल के विकास की प्रक्रिया (क्रॉप फिजियोलॉजी) और कीटों के चक्र के बारे में किसानों की समझ मजबूत करने से उन्हें बदलते कृषि परिवेश में सटीक निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
विश्व दलहन दिवस की इस पहल के माध्यम से गोदरेज एग्रोवेट ने क्षमता निर्माण और टिकाऊ फसल प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय किसानों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया, जो देश में एक मजबूत दलहन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहायक है।
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