रुद्रप्रयाग: द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर एवं तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि कल यानी बैसाखी पर्व के पावन अवसर पर घोषित की जाएगी. इसी दिन चल विग्रह उत्सव डोलियों के शीतकालीन गद्दी स्थलों से धाम प्रस्थान का शुभ मुहूर्त भी निकाला जाएगा.

हर साल बैसाखी के दिन निकाली जाती है तिथियां: धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, हर साल बैसाखी के दिन विद्वान आचार्यों और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में पंचांग का गहन अध्ययन कर कपाट उद्घाटन की तिथियां निर्धारित की जाती हैं. इस अवसर पर दोनों शीतकालीन गद्दीस्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.

भगवान शिव की मध्य भाग की होती है पूजा: बता दें कि मद्महेश्वर या मध्यमहेश्वर धाम में भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा होती है. इसलिए इस धाम को मद्महेश्वर या मध्यमहेश्वर कहा जाता है. इसके अलावा भगवान मद्महेश्वर को केदारघाटी समेत मनसूना समेत तुंगनाथ घाटी के लोग न्याय के देवता के रूप में भी पूजते हैं. भले ही मंदिर में भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा होती है, लेकिन भगवान मद्महेश्वर की स्थानीय लोग न्याय के देवता के रूप में भी पूजा अर्चना करते हैं.

"द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट खुलने की तिथि एवं चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ) से धाम के लिए प्रस्थान का शुभ मुहूर्त बैसाखी पर्व पर पंचांग गणना के आधार पर घोषित किया जाएगा. यह घोषणा मंदिर समिति के पदाधिकारियों, विद्वान आचार्यों एवं हक-हकूकधारियों की उपस्थिति में की जाएगी. तिथि घोषणा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं."- डीएस भुजवाण, प्रभारी अधिकारी, ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ

भगवान शिव के भुजाओं की होती है पूजा: बता दें कि हिमालय में सबसे ऊंचाई और चंद्रशिला की तलहटी में विराजमान तुंगनाथ धाम पंच केदारों में तृतीय केदार है. यहां भगवान शिव के भुजाओं की पूजा होती है. तुंगनाथ मंदिर की ऊंचाई समुद्र तल से 3,680 मीटर है. जो 1,000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है. तुंगनाथ मंदिर से ठीक एक किमी ऊपर चंद्रशिला शिखर मौजूद है. यहां पर गंगा मैया का मंदिर भी है. यहां से रुद्रप्रयाग और चमोली की हिम श्रृंखलाओं का दीदार होता है.

"तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि एवं चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से धाम के लिए प्रस्थान का मुहूर्त भी बैसाखी पर्व पर ही पंचांग गणना के अनुसार घोषित किया जाएगा. इस दौरान विद्वान आचार्यों एवं हक-हकूकधारियों की मौजूदगी रहेगी."- बलवीर सिंह नेगी, प्रबंधक, तुंगनाथ धाम