शिलांग,  खेल और युवा मामले विभाग तथा शिक्षा विभाग, मेघालय सरकार ने अभिनव बिंद्रा फाउंडेशन के साथ ओलम्पिक मूल्य शिक्षा कार्यक्रम (OVEP) शुरू करने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम पूरे मेघालय के विद्यालयों में लागू किया जाएगा। ओ.वी.ई.पी. (OVEP) एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य खेल और ओलम्पिक की भावना के माध्यम से युवाओं में उत्कृष्टता, सम्मान और मित्रता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना है। यह जीवन कौशल, समग्र विकास और समाज की भलाई को भी प्रोत्साहित करता है। यह हस्ताक्षर समारोह मुख्यमंत्री शकॉनराड के. संगमा की उपस्थिति में आयोजित हुआ। इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार डी. (IAS), आयुक्त एवं सचिव, खेल और युवा मामले विभाग;  डी. डी. शिरा (MCS), निदेशक, खेल और युवा मामले विभाग; बंटेलांग जे. खारशांडी (MCS), निदेशक, विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग; अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता और फाउंडेशन के संस्थापक  अभिनव बिंद्रा उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस कार्यक्रम को सार्थक और परिवर्तनकारी बताते हुए कहा, “हम हमेशा अपने युवाओं को केंद्र में रखकर नीतियाँ और कार्यक्रम बनाते हैं। हमारी हर कोशिश यही होती है कि हमारे युवा ज़िम्मेदार और उत्पादक नागरिक बनकर राज्य और देश के विकास में योगदान दें।”उन्होंने आगे कहा कि आज हुए इस MoU से युवाओं का व्यक्तित्व केवल खेल के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि उत्कृष्टता, मित्रता और सम्मान जैसे मूल्यों के साथ भी निखरेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, “मेघालय की लगभग पचास प्रतिशत आबादी युवा है। इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि हम अपने युवाओं में निवेश करें। चाहे वे खेल में हों या न हों, खिलाड़ी बनें या न बनें, इस कार्यक्रम से मिलने वाले मूल्य उनके जीवन के हर पहलू में काम आएँगे।” अभिनव बिंद्रा ने कहा, “खेल युवाओं को विनम्रता, धैर्य, टीम भावना, सम्मान और आत्मसम्मान सिखाते हैं। यही सब बातें ओलम्पिक मूल्य शिक्षा कार्यक्रम के केंद्र में हैं। अनुभवात्मक शिक्षा और खेलों के माध्यम से हम इन मूल्यों को युवाओं में उतारना चाहते हैं, ताकि वे जीवन के हर क्षेत्र में सफल हों।” ओ.वी.ई.पी. को मेघालय में इस तरह बनाया जाएगा कि इसमें पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी शामिल हों, ताकि यह बच्चों के लिए और भी नज़दीकी और उपयोगी हो। यह कार्यक्रम केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अभिभावक, समुदाय के नेता और स्थानीय युवा समूह भी जुड़े रहेंगे, ताकि पूरे समाज तक इन मूल्यों का विस्तार हो सके। कार्यक्रम का एक बड़ा लक्ष्य समावेशिता है यानी हाशिए पर रहने वाले बच्चों और दिव्यांग विद्यार्थियों तक पहुँचना। इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण और साधन दिए जाएँगे, ताकि हर छात्र अपनी ज़रूरत के अनुसार खेल और गतिविधियों से लाभ उठा सके।