द्वारा आशीष तिवारी, चीफ मार्केटिंग ऑफीसर, होम क्रेडिट इंडिया

पीढ़ियों से, भारत में पर्सनल फाइनेंस का मूल आधार पैसा बचाना रहा है। चाहे वह किसी भी आपात स्थिति के लिए नकद अलग रखना हो, एक सावधि जमा खोलना हो, या एक आवर्ती जमा शुरू करना हो, बचत को सबसे सुरक्षित और सबसे जिम्मेदार वित्तीय आदत माना जाता था।

मगर आज के इस गतिमान आर्थिक परिदृश्य में, केवल बचत करना ही काफी नहीं है। बढ़ती महंगाई, विकसित होती वित्तीय आकांक्षाओं और डिजिटल निवेश साधनों तक आसान पहुँच के कारण, अब बातचीत केवल पैसा बचाने से हटकर इसे रणनीतिक रूप से निवेश करने की ओर केंद्रित हो गई है। यह बदलाव न केवल समझदारी भरा है - यह एक जरूरत है।

दो वित्तीय यात्राओं की कहानी

बचत आवश्यक है और हमेशा एक बुनियादी आदत रहेगी। यह अनुशासन का निर्माण करती है, तरलता  प्रदान करती है, और आपात स्थितियों के लिए सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती है। हालाँकि, यहाँ एक कठोर सत्य है: मुद्रास्फीति खामोशी से धन को खत्म करती है। यह पारंपरिक बचत खातों में निष्क्रिय पड़े पैसे के मूल्य को चुपचाप कम करती रहती है।

आइए, भारत में रहने वाले दो दोस्तों, जितेश और हितेश की कहानी पर एक नज़र डालते हैं, जबकि देश की औसत मुद्रास्फीति दर लगभग 5-6% के आसपास रही है।

जितेश ने सुरक्षित रहने को चुना और ₹1 लाख की राशि को एक फिक्स्ड डिपॉजिट  में 10 साल के लिए जमा कर दिया, जिस पर उसे सालाना लगभग 6.5% का रिटर्न मिला। सतह पर, यह एक समझदारी भरा विकल्प लगा। लेकिन मुद्रास्फीति (मान लिया गया @5.5%) को ध्यान में रखने के बाद, उसका रिटर्न केवल ~₹1.87 लाख रहा। यह दर्शाता है कि उसकी संपत्ति मामूली रूप से बढ़ी, लेकिन बढ़ती कीमतों को मुश्किल से ही मात दे पाई।

दूसरी ओर, हितेश ने एक अलग रास्ता चुना। उसने ₹1 लाख को निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में निवेश किया, जिसने पिछले एक दशक में ऐतिहासिक रूप से सालाना 12–14% का रिटर्न दिया है। मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने के बाद, उसका निवेश 10 वर्षों के बाद लगभग ₹3.11 लाख हो गया। यह महत्वपूर्ण संपत्ति निर्माण को दर्शाता है।

अंतर साफ है- दोनों ने एक ही अवधि के लिए एक ही राशि से शुरूआत की लेकिन केवल एक ने स्मार्ट निवेश के जरिए चक्रवृद्धि की ताकत का लाभ उठाया। यह एक सशक्त व याद रखने वाली बात है कि वास्तविक संपत्तिक केवल बचत करके नहीं बनती, बल्कि अपने पैसे को मुद्रास्फीति से भी ज़्यादा तेज़ी से काम करवा कर बनाई जाती है। यही चक्रवृद्धि रिटर्न और दीर्घकालिक योजना की शक्ति है।

निवेश का मतलब है वृद्धि

जब लोग निवेश शब्द सुनते हैं, तो वे अक्सर सोचते हैं कि यह केवल अमीरों के लिए है या उन लोगों के लिए है जो बड़े जोखिम लेने को तैयार हैं। लेकिन यह एक भ्रम है। अपने मूल रूप में, निवेश का सीधा अर्थ है अपने पैसे को काम पर लगाना ताकि वह समय के साथ बढ़ता रहे।

बचत के विपरीत, जिसका उद्देश्य पैसे को सुरक्षित और कम जोखिम वाले तरीके से संरक्षित करना है, निवेश का उद्देश्य विकास है। यह म्यूचुअल फंड, स्टॉक्स और ईटीएफ, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट), डिजिटल गोल्ड, पेंशन प्लान और यूलिप्स जैसे वित्तीय साधनों को चुनने के बारे में है, जिनमें मुद्रास्फीति से अधिक रिटर्न अर्जित करने की क्षमता होती है।

आज निवेश करना आसान, सहज और मोबाइल-फर्स्ट हो गया है। कम शुरुआती बाधाओं, उपयोगकर्ता के अनुकूल ऐप्स और एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान), इंडेक्स फंड्स और डिजिटल गोल्ड जैसे छोटे-छोटे विकल्पों के साथ, पहली बार निवेश करने वाले भी प्रति माह सिर्फ ₹500 से शुरुआत कर सकते हैं।

अपनी संपत्ति बढ़ाने का आसान और स्मार्ट रोडमैप

यहाँ जीवन के विभिन्न चरणों के लिए एक सरल और स्मार्ट रोडमैप दिया गया है:

  •  अपनी आयु 20 तक पहुंचने पर:  आदत का निर्माण करें

छोटी शुरुआत करें, लेकिन जल्दी शुरुआत करें। आपकी सबसे बड़ी संपत्ति समय है। चक्रवृद्धि के कारण, इंडेक्स फंड या ईटीएफ में प्रति माह ₹500–₹1,000 की एक छोटी एसआईपी भी 10–20 वर्षों में काफी बढ़ सकती है।

  • 30-40 की उम्र में:  विकास और विविधता लाएं

यह आपका संपत्ति- निर्माण चरण है। अपने निवेश को घर खरीदना या बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने जैसे जीवन लक्ष्यों के साथ संरेखित करें। अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर, पीपीएफ, रीट, यूलिप्स के साथ टर्म इंश्योरेंस, और विविध म्यूचुअल फंड  के मिश्रण पर विचार करें, जिसमें मासिक निवेश ₹5,000 से ₹25,000 तक हो सकता है।

  • 50 की उम्र और उसके बाद स्थिरता पर ध्यान दें

अपना ध्यान पूंजी संरक्षण और आय सृजन  पर केंद्रित करें। सेवानिवृत्ति योजनाएँ, वरिष्ठ नागरिक बचत योजनाएँ, फिक्स्ड डिपॉजिट और बैलेंस्ड म्यूचुअल फंड जैसे सुरक्षित विकल्पों का पता लगाएं।

बचत शुरूआत है, लेकिन निवेश करने से भविष्य का निर्माण होता है

आज के कमाने वाले—विशेषकर जेन ज़ी और मिलेनियल्स—केवल-बचत वाली मानसिकता से हटकर उद्देश्यपूर्ण निवेश को अपनाने वाली मानसिकता की ओर बढ़ रहे हैं। इस नए युग में वित्तीय स्थिरता इस बात से तय नहीं होती कि आप कितना बचाते हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आपका पैसा कितनी प्रभावी ढंग से बढ़ता है। और डिजिटल उपकरणों के कारण निवेश सुलभ हो गया है, इसलिए शुरुआत करना अब मुश्किल नहीं है—यह बस एक टैप दूर है। उदाहरण के लिए, होम क्रेडिट इंडिया की वित्तीय साक्षरता पहल 'पैसे की पाठशाला' ग्राहकों को स्मार्ट धन प्रबंधन कौशल के साथ शिक्षित और सशक्त बनाती है।

याद रखें, संपत्ति के निर्माण के लिए पूर्णता की नहीं, बल्कि एकशन की आवश्यकता होती है। आपको शुरुआत करने के लिए बहुत अधिक पूंजी या गहन वित्तीय ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। आपको बस शुरुआत करने की आवश्यकता है—स्मार्ट तरीके से, जल्दी और लगातार। जब आप निवेश करते हैं, तो आप केवल पैसा जमा नहीं कर रहे होते हैं—आप अर्थव्यवस्था के विकास में भाग ले रहे होते हैं। आप कंपनियों को धन उपलब्ध करा रहे हैं, नवाचार का समर्थन कर रहे हैं, और उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो बदले में आपको लाभांश, ब्याज या पूंजी वृद्धि के माध्यम से पुरस्कृत करते हैं।

इसे इस तरह समझें: बचत एक पतवार से नाव चलाने जैसा है। आप आगे बढ़ेंगे, लेकिन धीरे-धीरे—और गोल-गोल घूमते रहेंगे। निवेश दूसरी पतवार है। जब दोनों एक साथ काम करते हैं, तो आप अपनी वित्तीय यात्रा में संतुलन, गति और दिशा प्राप्त करते हैं और अपनी #ज़िंदगीहिट बनाते हैं।