एलएनसीटी समूह के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग द्वारा आज एक प्रेरणादायी उद्बोधन एवं इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया गया जिसका विषय "डिस्कवर द अर्जुन इन यू "  था ,  शनिवार को एलएनसीटी एंड एस, एलएनसीटी समूह  के  जगदीश चंद्र बोस ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की  पूजा, वंदना के साथ हुआ, इसके पश्चात  अतिथियों प्रो. सतीश मोध , प्रो वाइस चांसलर और डीन , सोमैया विद्याविहार यूनिवर्सिटी, मुंबई , अशोक पांडे  , प्रांत संघचालक, मध्य भारत एवं सेवानिवृत न्यायधीश , वी वी एस मूर्ति  , वरिष्ठ अधिवक्ता का पौधे , शाल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर आत्मीय अभिनंदन  जे एन चौकसे , चेयरमैन एलएनसीटी समूह एवं डा. अनुपम चौकसे , सचिव एलएनसीटी समूह ने किया। प्रो. सतीश मोध  ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से गीता के श्लोकों की व्याख्या करते हुए, उनमें छिपे गूढ़ अर्थों को समझाया , आपने कहा कि एक समय अर्जुन अपना सिर कटवाने के लिए तत्पर थे पर श्री कृष्ण की प्रेरणा से अपना कर्म करने के लिए तैयार हुए , आपने कहा कि आपको निर्णय लेना है की संजय बनना है या धृतराष्ट्र या दुर्योधन और या अर्जुन, आपने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति, ज्ञान परंपरा में नारी सशक्त ही है , जिस घर में नारी का सम्मान है वहां सुख, शांति और समृद्धि है। आदरणीय अशोक पांडे  , प्रांत संघचालक मध्य भारत, सेवानिवृत न्यायधीश ने कहा कि कुछ गलत धारणाऐं बनाई गई की गीता पाठ मृत्यु के समय किया जाए जबकि गीता जीवन जीने की कला सीखती है।आपने सभी से स्वदेशी अपनाने, भारतीय ज्ञान परंपरा से आत्म निर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। श्री जे एन चौकसे, चेयरमैन - एलएनसीटी समूह ने सभी शिक्षकों, कर्मचारीयों, स्टूडेंट्स से आह्वान किया की वे यहां से सीखी बातों को अपने साथियों  से भी शेयर करें और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करें। डा. अनुपम चौकसे , सचिव एलएनसीटी समूह ने कहा की हम समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वदेशी, भारतीय संस्कृति के प्रचार - प्रसार के लिए कटिबद्ध हैं।  वी वी एस मूर्ति  ने कहा इस अद्भुत कार्यक्रम के साक्षी बनने पर आप सभी को बधाई। इस अवसर पर गीता के ज्ञान और माननीय प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी  के ऊपर लिखी किताब का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डा. अशोक कुमार राय, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन,  एम एल राय , प्राचार्य, विभागाध्यक्ष,  शिक्षक, कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो.(डा.) अमितबोध ने किया ।