अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण (IHW) सम्मेलन 2025 का तीसरा संस्करण, सम्मेलन के विषय 'हृदय के स्वास्थ्य, जीवनशैली और मानसिक कल्याण के लिए मन-शरीर चिकित्सा' से जुड़े महत्वपूर्ण मुख्य भाषणों और पैनल चर्चाओं के साथ पूरे उत्साह के साथ चल रहा है। चिकित्सा, योग, आयुर्वेद और ध्यान के क्षेत्र के प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति; नीति-निर्माता, शिक्षक, शोधकर्ता, सामुदायिक समर्थक, जीवनशैली शोधकर्ता आयुष मंत्रालय, एम्स (नई दिल्ली), आईसीएमआर एनआईटीएम (राष्ट्रीय पारंपरिक चिकित्सा संस्थान), आईटीआरए (आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान) और हार्टफुलनेस संस्थान द्वारा आयोजित एक मंच पर एकत्रित हुए। माननीय आयुष मंत्री, भारत सरकार  प्रतापराव जाधव और  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, गुजरात सरकार ऋषिकेश पटेल इस अवसर पर क्रमशः मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक और पारंपरिक स्वास्थ्य दृष्टिकोणों को व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से एकीकृत करना, समग्र और साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के माध्यम से पुरानी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में सुधार करना और स्वास्थ्य के एक व्यापक मॉडल को बढ़ावा देना है जो कल्याण के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक आयामों को संबोधित करता है। उद्घाटन सत्र हार्टफुलनेस ध्यान के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद हार्टफुलनेस रिसर्च काउंसिल के अध्यक्ष डॉ कृष्णमूर्ति जयन्ना ने स्वागत भाषण दिया। अपने भाषण में  आयुष मंत्री, भारत सरकार  प्रतापराव जाधव ने कहा, "IHW 2025 समग्र कल्याण के लिए प्रमुख धाराओं का संगम है जो समग्र स्वास्थ्य पर सार्थक और प्रासंगिक चर्चा और विचार-विमर्श लाता है। कान्हा शांति वनम की शांति एक आदर्श पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनुकरणीय है। हमारी पारंपरिक चिकित्सा बिना किसी दुष्प्रभाव के आत्मनिर्भर है। आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित योग और ध्यान के पारंपरिक ज्ञान को अपनाने जैसे सही उपायों से किया जा सकता है। आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित 'प्रकृति परीक्षण अभियान' एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, एक स्वस्थ समाज और एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में मदद कर रहा है। इस मिशन की सफलता का मूल उद्देश्य भारत के प्रत्येक नागरिक तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना है। माननीय प्रधानमंत्री मोदीजी का मानना है कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच ही न्याय तक पहुँच है। भारतीय पारंपरिक ज्ञान को दुनिया भर में मान्यता मिल रही है और इस बारे में जागरूकता भी बढ़ रही है। भारत सरकार देश भर में आयुष अस्पताल स्थापित कर रही है। हार्टफुलनेस के कल्याण कार्यक्रम समग्र स्वास्थ्य के लिए असाधारण हैं और अपने असाधारण परिसर में आत्मा का पोषण करते हैं। जब हृदय शांत होता है तो मन भी शांत होता है। हार्टफुलनेस हमारे समग्र स्वास्थ्य पर हृदय और मन के संबंध के असर पर शोध कर रहा है। कान्हा शांति वनम, श्रद्धेय दाजी के कुशल मार्गदर्शन में एक स्वस्थ राष्ट्र की उत्पत्ति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।“ हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक और राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष श्रद्धेय दाजी द्वारा लिखित 'द हार्टफुलनेस वे - बुक 2' नामक एक पथ प्रदर्शक पुस्तक का विमोचन किया गया। इसके बाद माननीय मंत्री महोदय का अभिनंदन किया गया। एम्स, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास, आईटीआरए, जामनगर की निदेशक डॉ. तनुजा नेसारी, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के निदेशक डॉ. काशीनाथ समागंडी ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। 'भारत में हृदय स्वास्थ्य और रोग तथा इसका कल्याण से संबंध' विषय पर मुख्य भाषण पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष और मानद विशिष्ट प्रोफेसर डॉ. श्रीनाथ रेड्डी ने दिया।