मणिपाल हॉस्पिटल्स ने कुमारटुली के शिल्पकारों के स्वास्थ्य सुरक्षा का संकल्प लिया
कोलकाता: जब पूरा बंगाल माँ दुर्गा के आगमन की तैयारी भव्यता और उल्लास के साथ कर रहा है, तब मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता, जो देश के अग्रणी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक है, ने एक अनोखी पहल करते हुए उन कारीगरों को सम्मान दिया, जिनके हाथों से माँ दुर्गा की मूर्तियाँ आकार लेती हैं। आज आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता ने इन मूर्तिकारों को सम्मानित किया और उनके स्वास्थ्य व कल्याण की ज़रूरतों पर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. अयनाभ देबगुप्ता, रीजनल चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर, मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ डॉ. कुनाल सरकार, डॉ. विकास कपूर, डॉ. शुभायु बनर्जी, डॉ. सौरव दत्ता, डॉ. पायल बोस, डॉ. किशन गोयल, डॉ. देबराज जाश, डॉ. सुजीत चौधुरी, डॉ. अंशु सेन, डॉ. सुरंजन मुखर्जी, डॉ. स्मिता मोइत्रा, डॉ. सीमा दत्ता राय, डॉ. परोमिता कंजिलाल चक्रवर्ती, डॉ. सौमन बसु, डॉ. अभिनिबेश चटर्जी और डॉ. पॉली चटर्जी भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर कारीगरों को सम्मान दिया और इस पहल को समर्थन प्रदान किया। रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन्स (RWAs) और आइडल मेकर्स एसोसिएशन के सहयोग से मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता ने प्रतिमा-निर्माताओं के लिए प्रिविलेज हेल्थ कार्ड्स लॉन्च किए, ताकि उन्हें प्राथमिकता आधारित इलाज, चिकित्सा परामर्श और अन्य स्वास्थ्य लाभ मिल सकें। कार्यक्रम में मूर्तिकारों को उनके अद्वितीय शिल्प और समर्पण के लिए सम्मानित भी किया गया। दिन का एक प्रमुख आकर्षण रहा पैनल डिस्कशन “रोकथाम इलाज से बेहतर है”, जिसमें विशेषज्ञों ने कुमारटुली के शिल्पियों को उनके काम की वजह से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं—जैसे कार्डियक, आँखों की देखभाल, श्वसन, आर्थोपेडिक्स, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और इमरजेंसी मेडिसिन—से बचाव के लिए जरूरी टिप्स और सावधानियाँ बताईं। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जहाँ मूर्तिकारों ने डॉक्टरों से खुलकर अपनी स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा की। इस पहल पर डॉ. अयनाभ देबगुप्ता ने कहा: “दुर्गा पूजा कोई उत्सव नहीं, यह बंगाल की आत्मा है। कुमारटुली के शिल्पकार हर साल अपनी निष्ठा से माँ को जीवन देते हैं। उनका यह प्रयास महज़ शिल्पकला नहीं, बल्कि उपासना है और यही इस भूमि की पहचान है। मणिपाल हॉस्पिटल्स में हम उनके इस भाव को प्रणाम करते हैं और उनके स्वास्थ्य व कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। जैसे वे अपनी कला से बंगाल की संस्कृति, परंपरा और आस्था को जीवित रखते हैं, वैसे ही हम उनके स्वास्थ्य का ध्यान अपने अनुभव और करुणा से रखेंगे। यह पहल हमारा संकल्प है कि जो हाथ माँ दुर्गा का स्वरूप गढ़ते हैं, वे सदा स्वस्थ, सशक्त और सम्मानित रहें।”
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