राजनीति में नाम बदले, पर शहर की समस्याएं जस की तस
इंदौर। इंदौर में एक स्टेडियम का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण से जोड़ दिया है।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्टेडियम का नाम बदलने के पीछे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की “गंदी नियत” साफ दिखाई देती है। पार्टी का आरोप है कि ऐसे फैसलों के जरिए समाज में ध्रुवीकरण और नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी नेताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज देश के गौरव हैं और पूरे देश में उनका सम्मान किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर में वर्षों से हॉकी स्टेडियम की मांग कर रहे खिलाड़ियों के लिए नया स्टेडियम बनाकर उसे शिवाजी महाराज के नाम से करना ज्यादा बेहतर नहीं होता। कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन और शहर के महापौर पर भी निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पुष्यमित्र भार्गव अपनी नाकाबिलियत और नगर निगम में फैले कथित भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के फैसले ले रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की जनता को मूलभूत सुविधाएं देने में नगर निगम पूरी तरह विफल रहा है। उनका आरोप है कि जो प्रशासन लोगों को एक गिलास साफ पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा, वह केवल नाम बदलने की राजनीति में लगा हुआ है। इस मुद्दे को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है और आने वाले दिनों में नगर निगम के फैसले पर और भी सियासी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। वहीं, नगर निगम की ओर से पहले भी यह कहा गया है कि शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को सम्मान देने के उद्देश्य से कई स्थानों के नाम बदले जा रहे हैं।
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