नई दिल्ली : माननीय रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने  लद्दाख के चुशुल में एनटीपीसी के 3.7 मेगावॉट सोलर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया, जो क्षेत्र में अपनी तरह का पहला सोलर-हाइड्रोजन प्रोजेक्ट है। चुनौतीपूर्ण एवं ज़्यादा उंचाई वाले इलाके के बावजूद यह प्रोजेक्ट आठ महीने की रिकॉर्ड अवधि में शुरू हो गया है।

 

सोलर-हाइड्रोजन आधारित माइक्रोग्रिड उन डीज़ल जनरेटर सेट्स को प्रतिस्थापित करेगा, जिनका इस्तेमाल वर्तमान में रिमोट आर्मी लोकेशनों में किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम होगा और स्वच्छ एवं अधिक भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय उत्पादन और हरित ऊर्जा की उपयोगिता को सशक्त बनाकर यह परियोजना नीचले इलाकों से ईंधन के स्थानान्तरण की ज़रूरत को खत्म कर देगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां कम होंगी। इससे उत्पन्न होने वाली हर तीन युनिट पावर से सुदूर इलाकों से एक लीटर डीज़ल लाने की ज़रूरत कम हो जाएगी।

 

एनटीपीसी ने हाइड्रोजन को स्टोरेज मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करके एक स्टैंड-अलोन माइक्रोग्रिड डिज़ाइन किया है, जो साल भर दिन के किसी भी समय 200 किलोवॉट विद्युत की आपूर्ति करेगा। यह 4500 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद दुनिया में अपनी का अनूठा प्रोजेक्ट है, जहां सर्दियों में तापमान -40°सेल्सियस तक गिर जाता है। उम्मीद है कि पूरी तरह संचालन शुरू होने के बाद यह ऊंचाई वाले इलाकों में डिफेंस सेक्टर के विकार्बोनीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

 

एनटीपीसी लिमिटेड, देश की विद्युत की आवश्यकताओं में एक चौथाई योगदान देती है। इसकी इंस्टॉल्ड क्षमता 84,849 मेगावॉट है और 30.90 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 13.3 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है। कंपनी 2032 तक 60 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने तथा भारत के शुद्ध शून्य लक्ष्यों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

थर्मल, हाइड्रो, सोलर एवं विंड पावर प्लांट्स के विविध पोर्टफोलियो के साथ एनटीपीसी देश को भरोसेमंद, किफ़ायती एवं स्थायी विद्युत उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। कंपनी हरित भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों एवं सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने, और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

विद्युत उत्पादन के साथ एनटीपीसी ने कई नए कारोबार क्षेत्रों जैसे -मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, पम्प्ड हाइड्रो स्टोरेज, वेस्ट-टू-एनर्जी, न्युक्लियर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन समाधानों में भी प्रवेश किया है।