सियासी घमासान तेज: NIA पर ममता बनर्जी का तीखा हमला
कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा जिले के मोथाबाड़ी में हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार और एनआईए पर निशाना साधा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों का घेराव करने वाले असली गुनहगार तो भाग निकले हैं, लेकिन एनआईए अब बेकसूर स्थानीय लोगों को पकड़कर उन्हें परेशान कर रही है।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि दो सांप्रदायिक पार्टियों ने न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया और वहां से फरार हो गईं। अब एनआईए जांच के नाम पर हमारे स्थानीय युवाओं को प्रताड़ित कर रही है। इस एजेंसी ने जांच के बहाने करीब 50 मासूम लोगों को उठा लिया है। दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी का इशारा कथित तौर पर आईएसएफ और एआईएमआईएम की तरफ था।
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर जताई हैरानी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी रैली में मौजूद भीड़ से यह भी पूछा कि कितने लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं? इसके बाद दीदी ने मंच पर मौजूद अपनी पार्टी के स्थानीय नेताओं को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब हमारी पार्टी को यहां चुनावी रैलियां और बैठकें करने की कोई जरूरत नहीं है। मेरी पहली प्राथमिकता इन लोगों की मदद करना है। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए गए हैं, उनके नाम ट्रिब्यूनल में आवेदन करके वापस जुड़वाएं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे सीधे न्यायिक अधिकारियों के पास जाने के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए कानूनी रास्ता अपनाएं।
भाजपा पर लगाया माहौल बिगाड़ने का आरोप
इतना ही नहीं, सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि आप किसी भी तरह के उकसावे में न आएं। भाजपा चाहती है कि यहां हिंसा भड़के, जिससे वह केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके हमारे लोगों को उठा सके, जैसा कि उन्होंने मोथाबाड़ी में किया है।
क्या था पूरा मामला?
बताते चलें कि बुधवार को मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में भारी हंगामा हुआ था। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ अचानक हिंसक हो गई थी। इस भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को स्थानीय बीडीओ दफ्तर में और एक अन्य अधिकारी को उनकी गाड़ी में करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा था।इस दौरान जमकर पत्थरबाजी हुई,सड़कें जाम की गईं और पुलिस पर भी हमला किया गया था। इस मामले में राज्य की सीआईडी ने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है।
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